इंदौर। १६ मार्च। सुबह 8 से रात 10 तक की नौकरी और महिने भर की पगार 15 सौ रूप्ए। ये सच उन 23 बच्चों का है जिन्हे उत्तर प्रदेश से यहा पर लाकर यहा पर उनसे काम कराया जा रहा था।चाइल्ड हेल्प लाइन और पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार रात संयोगितागंज थाना क्षेत्र में एक मकान पर छापा मार कर इन बच्चों को मुक्त कराया ।
पुलिस ने बताया कि सूचना के संयुक्त टीम ने रात करीब 11 बजे श्यामाचरण शुक्ल नगर में एक मकान पर छापा मारा और 23 बच्चों को मुक्त कराया गया है। पुलिस के अनुसार मुक्त कराए गए सभी बच्चों की आयु ८ से १७ वर्ष के बीच है। ये उत्तरप्रदेश निवासी के निवासी है।पुलिस ने यहा से तीन लोगो संजय मिश्रा ममता मिश्रा और मनोज रायकवार को हिरासत में लिया है।
पुलिस ने बताया कि बच्चों को ज्यूस के ठेले किराए पर देकर भँवरकुआँ, जीपीओ सहित अन्य स्थानों पर भेजा जाता था और करीब 1500 से २ हजार रुपए प्रतिमाह मजदूरी दी जाती थी। उन्हें सुबह ८ से लेकर रात 10 बजे तक काम करना पडता था सूत्रों ने बताया कि 19 बच्चे तो 14 से भी कम साल के है।
पुलिस ने बताया कि सूचना के संयुक्त टीम ने रात करीब 11 बजे श्यामाचरण शुक्ल नगर में एक मकान पर छापा मारा और 23 बच्चों को मुक्त कराया गया है। पुलिस के अनुसार मुक्त कराए गए सभी बच्चों की आयु ८ से १७ वर्ष के बीच है। ये उत्तरप्रदेश निवासी के निवासी है।पुलिस ने यहा से तीन लोगो संजय मिश्रा ममता मिश्रा और मनोज रायकवार को हिरासत में लिया है।
पुलिस ने बताया कि बच्चों को ज्यूस के ठेले किराए पर देकर भँवरकुआँ, जीपीओ सहित अन्य स्थानों पर भेजा जाता था और करीब 1500 से २ हजार रुपए प्रतिमाह मजदूरी दी जाती थी। उन्हें सुबह ८ से लेकर रात 10 बजे तक काम करना पडता था सूत्रों ने बताया कि 19 बच्चे तो 14 से भी कम साल के है।
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